मेहमान भगवान् के समान होता है - इसे अपनाइए
मेहमान भगवान के समान होता है- यह तो हम सभी जानते है. यह हमारा कर्त्तव्य है की हम अपने मेहमानों की सवा और खातिरदारी में कोई कसर न छोड़े. परन्तु , भारत देश, जो अपनी मेहमान नवाजी और अतिथिसेवा के लिए विश्वभर में एक समय प्रसिद्ध था , आज अपनी यह खूबी खो रहा है. मेहमानों का आदर करना तो दूर, हम तो उनसे ठीक से बात करना भी भूल चुके हैं. किसी भी फिरंगी से कोई भी भारतीय अब प्यार और आदर से बात नहीं करता . उन्हें तंग करते हैं, मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें परेशान करते हैं. यह बिलकुल गलत है, क्योंकि इससे न ही हमारे देश के नाम पर धब्बा पड़ता है, बल्कि हमारा पवित्र संस्कारों का कोई अर्थ ही नहीं रहता. हमारे संस्कार कहते हैं - अतिथि देवो भवः . इसीलिए यह आवश्यक है की हम हमारे संस्कारों के अनुसार चलकर मेहमानों के प्रति स्नेहभाव और प्रेम रखे. हमें हमारे संस्कारों को नज़रंदाज़ न करते हुए यह हमेशा याद रखना चाहिए, की - अतिथि देवो भवः .
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